Hindi Kahaniya


Hindi story continued

जैसे कि पिछले लेख में आपने पढ़ा सीमा और उसकी पारिवारिक स्तिथि अब आगे पिछला लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे!
तभी रीता अंदर आ कर बोली, माँ मेरे लिए प्लास्टिक की गेंद ले कर आना, “क्यों तुम्हारे लिए क्यों लाऊ?” तुम न ही पढ़ती हो न ही घर का काम करना चाहती हो, तुम्हारे लिए कुछ नहीं लाऊंगी, सीमा ने डपट कर कहा! ” मैं काम कर दिया करुँगी तब तो लाओगी न ?” (more…)

Story in hindi with moral

सीमा ने घडी में समय देखा, 9 बजने में सिर्फ 25 मिनट बाकि थे, वह बेचैन नज़र आने लगी, दफ्तर पहुचने में उसे 5 मिनट लगते है, शेष 25 मिनट में उसे नहाना, कपडे पहनना और नाश्ता करना था!
उसका यह रोज़ का ही क्रम था, अगर 5 मिनट भी इधर उधर हो जाते थे तो उसे नाश्ता छोड़ना पड़ जाता था! देर होने की स्तिथि में कभी कभी उसे नहाने का कार्यक्रम स्थगित करना पड़ता था! इन 20 मिनटो में सीमा नहा कर कपडे ही बदल सकती थी, उस ने सोचा, इस बीच रीता चाय के लिए पानी रख देगी! सीमा ने नहाते हुए स्नानागार से ही आवाज़ लगायी, “रीता” ..
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