ज़िन्दगी है नादाँ इसलिए चुप हूँ,

ज़िन्दगी है नादाँ इसलिए चुप हूँ,
दर्द-ही-दर्द सुबह शाम इसलिए चुप हूँ,
कह दू ज़माने से दास्ताँ अपनी,
उसमे आएगा तेरा नाम इसलिए चुप हूँ.

ज़िन्दगी है नादाँ इसलिए चुप हूँ, was last modified: September 2nd, 2018 by komal